भोपाल हाट में चमकी ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की मेहनत, बायो-प्रोम’ ने दिलाई नर्मदापुरम जिले को खास पहचान

नर्मदापुरम। ग्रामीण क्षेत्र में स्वसहायता समूहों को अगर सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो वे भी सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं। इसकी बानगी भोपाल में आयोजित आजीविका फ्रेश मेले में देखने को मिली जहां नर्मदापुरम जिले ने मेला घूमने आई हर नजरों में अपनी अलग छाप छोड़ी। दरअसल भोपाल हाट में 23 एवं 24 अगस्त 2025 को आयोजित दो-दिवसीय ‘आजीविका फ्रेश मेला’ सिर्फ एक बाज़ार नहीं था, बल्कि यह मध्य प्रदेश की ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की दीदियों की मेहनत और आत्मनिर्भरता की एक अद्भुत मिसाल बन गया। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला पंचायत नर्मदापुरम के सहयोग से आयोजित इस मेले में, दीदियों द्वारा तैयार किए गए शुद्ध और पारंपरिक उत्पादों ने शहर के लोगों का दिल जीत लिया। समूहों की महिलाओं की मेहनत से तैयार बायो प्रोम ने यहां आए लोगों का जमकर ध्यान खींचा। इस बायो प्रोम ने नर्मदापुरम जिले की अलग पहचान स्थापित करने में। बड़ी भूमिका निभाई। इस मेले में तरह-तरह के स्टॉल लगे थे, जिनमें से सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र ‘बायो-प्रोम (फॉस्फेट युक्त जैविक खाद)’ रहा। ‘महिला शक्ति C।F’ और ‘प्रगति ग्राम संगठन ग्राम रंढाल की महिलाओं द्वारा इस जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है। यह उत्पाद खेती और बागवानी के लिए एक क्रांतिकारी विकल्प के रूप में उभरा है। बायो-प्रोम फसलों की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ, मिट्टी की सेहत सुधारने, जड़ों का विकास करने और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने में भी सहायक है। यह DAP का एक बेहतरीन विकल्प है और रसायन रहित खेती के लिए बहुत उपयोगी है। गौरतलब है कि कलेक्टर सोनिया मीना के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नर्मदापुरम सोजन सिंह रावत के मार्गदर्शन में ‘बायो-प्रोम यूनिट का शुभारम्भ कुछ महीनो पूर्व ही किया गया था। महिला शक्ति संकुल स्तरीय संघ की अध्यक्ष दमयंती वर्मा ने बताया कि बहुत कम समय में ही महिलाओं ने अपनी लगन से अब तक लगभग 20 टन PROM का निर्माण किया है, जिसमें से 18 टन का विक्रय भी हो चुका है। स्टॉल संचालक ममता भट्टी और पूनम ने बताया कि भोपाल के ग्राहकों ने स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति अपनी जागरूकता दिखाते हुए, बायो-प्रोम में जबरदस्त रुचि दिखाई। इसके अलावा मिलेट का पोहा, स्वास्थ्यवर्धक सूखी मशरूम और समूह की सदस्यों द्वारा बनाये गए गाँव की देशी खुशबु और स्वाद युक्त तरह-तरह के अचारों ने भी ग्राहकों का दिल जीता। इन सभी देशी और स्थानीय उत्पादों की शुद्धता और बेहतरीन गुणवत्ता को खूब सराहा गया। यह मेला सिर्फ हाट बाज़ार नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण समूहों की महिलाओं की उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की कहानी कहता है, जो अपनी मेहनत से अपनी आजीविका सुरक्षित करने के साथ-साथ रसायन रहित एवं प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दे रही हैं।