जिला सहकारी बैंक के 3 कर्मचारियों ने किया था गबन, लालच के चक्कर में नौकरी से धो बैठे हाथ….

कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक में दिए गए निर्देश

नर्मदापुरम। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक नर्मदापुरम के द्वारा गबन व धोखाधड़ी में लिप्त 1 अधिकारी और 2 कर्मचारियों की सेवायें समाप्त कर दी गई है। इन तीनों ने अपने क्षेत्राधिकार की बैंक शाखा में धोखाधड़ी कर राशि का गबन किया था। मामला खुलने के बाद हुई जांच में तीनों को जांच रिपोर्ट में दोषी करार दिया गया था। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर तीनों को शासकीय सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है। यह जानकारी कलेक्टर एवं प्रशासक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित नर्मदापुरम सोनिया मीना की अध्यक्षता में बैंक स्टाफ उपसमिति की आयोजित बैठक के बाद सामने आई है। यह बैठक प्रधान कार्यालय नर्मदापुरम के सभाकक्ष में में आयोजित की गई।  बैठक में उपायुक्त सहकारिता जिला नर्मदापुरम शिवम मिश्रा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित नर्मदापुरम विनय प्रकाश सिंह उपस्थित रहे।

खिरकिया शाखा में 43 लाख का गबन

कलेक्टर सोनिया मीना द्वारा बैंक की शाखा खिड़किया से 43 लाख रूपये की फर्जी एडवाईज जारी कर समायोजन किये जाने की शिकायत मिलने पर तत्कालीन लिपिक ज्ञानेश्वर काले शाखा खिड़किया और तत्कालीन लिपिक भावना काले मुख्य शाखा हरदा को कारण बताओं सूचना पत्र देने के बाद की विभागीय जांच प्रभारी शाखा प्रबंधक शाखा खिड़किया सुनील धनगर एवं तत्कालीन समिति प्रबंधक मुकेश गौर को बैंक द्वारा जारी कारण बताओं सूचना पत्र की विभागीय जांच  प्र.नोडल अधिकारी, नोडल शाखा हरदा सतीशचंद्र सिटोके से कराई गई। उक्त दोनों जांच अधिकारियों द्वारा जारी कारण बताओ सूचना पत्र में दोषी कर्मचारियों पर बैंक द्वारा लगाये गये आरोप प्रमाणित पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर ज्ञानेश्वर काले को बैंक के आदेश क्रमांक 3874 दिनांक 12.03.2026, भावना काले को बैंक के आदेश क्रमांक 3877 दिनांक 12 मार्च 2026 एवं मुकेश गौर को बैंक के आदेश क्रमांक 3875 दिनांक 12 मार्च 2026 से सेवा समाप्त करने के दण्ड से दंडित किया गया।

हरदा शाखा में भी घपला, होगी रिकवरी

इसी प्रकार बैंक की शाखा मुख्य हरदा में राशि रूपये 2.77 करोड़ के सिलक शार्टेज के प्रकरण में तत्कालीन प्र.शाखा प्रबंधक मुख्य शाखा हरदा सुदर्शन जोशी एवं भावना काले, तत्कालीन लिपिक/कैशियर को कारण बताओं सूचना पत्र जारी किये जाकर विभागीय जांच संस्थित की गई थी। उक्त दोनों कर्मचारियों को जारी कारण बताओं सूचना पत्र की विभागीय जांच 03 सदस्यीय जांच दल को सौंपी गई थी। जांच दल के द्वारा बैंक को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में उक्त दोनों दोषी कर्मचारियों पर बैंक द्वारा लगाये गये आरोपो सही बताया। आरोप सिद्ध पाये जाने पर जोशी के सेवानिवृत्त होने से प्रस्तावित दंड दिया जाना संभव नहीं होने एवं भावना काले को सेवामुक्ति दंड में किसी प्रकार की कमी नहीं करते बैंक के आदेश क्रमांक 3875 दिनांक 12 मार्च 2026 से सेवा समाप्त करने के दंड से दंडित किया गया तथा प्रकरण में उक्त दोनों दोषियों से उक्त प्रकरण की शेष रही ब्याज की राशि रूपये 35.46 लाख की वसूली हेतु सहकारी विधान की धारा 64 में सक्षम न्यायालय में वाद दायर करने के शाखा प्रबंधक मुख्य शाखा हरदा को निर्देश दिये गये।

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