पांच भूखंडों की लीज रद्द कराने इटारसी नगरपालिका पहुंची कोर्ट] बिना अधिकार रजिस्ट्री करने वालों को बचा रही इटारसी नगरपालिका

राहुल शरण, इटारसी। इटारसी नगरपालिका(itarsi nagarpalika )परिषद की किरकिरी बन रहे शहर के पांच भूखंडों की लीज(plot lease) निरस्त कराने नगरपालिका कोर्ट पहुंच गई है। इटारसी नगरपालिका प्रशासन ने कोर्ट में इन सभी पांचों की लीज निरस्त करने के लिए परिवाद पत्र दिया है। यह पांचों भूखंडा कोविड के पहले की नगरपालिका परिषद के कार्यकाल के हैं जिन्हें नगरपालिका के राजस्व विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों ने अपनी जेब भरने की मंशा से नियमों को ताक पर रखकर बेचा था।
पूर्व की नगरपालिका परिषद के कार्यकाल में राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में शहर में पार्क और सडक़ों के लिए छोड़े गए भूखंडों को कूटरचित दस्तावेज बनाकर बेचा था। इन भूखंडों के विक्रय के एवज में नपा के कर्मचारियों-अधिकारियों ने जमकर अपनी हथेलियां गर्म की थीं। बाद में उनके इन कारनामों की शिकायतें हुईं और मामले कोर्ट तक जा पहुंचे। उक्त सभी मामलें अभी कोर्ट में हैं। इस पूरी प्रक्रिया पर गौर करें तो यह सवाल उठता है कि इटारसी नगरपालिका प्रशासन भूखंड खरीदने वालों की लीज रद्द करने के लिए तो कदम उठा रहा है मगर जिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। इटारसी नपा की तरफ से अब सिटी थाने में उन पर एफआईआर का एक आवेदन तक नहीं दिया जाना, उनका संरक्षण करने की तरफ इशारा कर रहा है।
इन भूखंडों की लीज पर आपत्ति
१. शुभांगी शंकर रसाल(shankar rasal) के नाम से भूखंड क्रमांक 81 ए के नाम से लीज डीड की गई थी।
२. मेघा सचिन जैन (megha sachin jain)के नाम से भूखंड क्रमांक 51 ए के नाम से लीज लीड बनाई गई थी
३. सुरेश नंदवानी(suresh nandwani)– पुलिस कॉलोनी के पिछले हिस्से में एक भूखंड की लीज डीड बनाई गई
४. आशा नंदवानी–इस नाम से पुलिस कॉलोनी के पिछले हिस्से में भूखंड की लीज डीड बनाई गई
५.पंकज जैन- इनके नाम से भी नपा के अधिकारियों-कर्मचारियों ने लीज डीड की थी
६. अजय मित्तल- इनके नाम से भी एक भूखंड की लीज डीड तैयार की गई थी।
किस भूखंड की क्या स्थिति
मामला एक-81 ए नाम से जिस भूखंड का अवैधानिक विक्रय गया था उसका मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। यह मामला एडीजे कोर्ट में क्रिमिनल केस के तौर पर सुनवाई है जिसका निर्णय जल्द आ सकता है।
मामला दो-पत्रकार कॉलोनी के पास 51 ए नाम से जो भूखंड विक्रय किया गया था उस मामले में नगरपालिका के पहले नोटिस के विरुद्ध कब्जाधारी ने तृतीय सत्र न्यायालय में केस लगाया है।
मामला तीन-सुरेश नंदवानी और आशा नंदवानी के नाम से हुई लीज डीड का मामला भी हाईकोर्ट गया था जिसमें स्टे जारी हुआ था। उसमें अपुष्ट जानकारी यह सामने आई है कि स्टे की अवधि खत्म हो चुकी है।
मामला चार-पंकज जैन के नाम से जिस भूखंड की लीज डीड तैयार की गई थी उसमें उन्होंने स्वयं ही लिखकर दे दिया है कि उनकी लीज डीड निरस्त की जाए मगर अब तक इसमें निर्णय नहीं हो पाया है
इटारसी नपा का तर्क, अधिकार नहीं था
इटारसी नगरपालिका प्रशासन ने कोर्ट में जो परिवाद पत्र प्रस्तुत किया है उसमें ५ भूखंड ऐसे हैं जिनमें लीज डीड की प्रक्रिया तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव के माध्यम से हुई थी और अजय मित्तल वाले भूखंड की लीज डीड राजस्व निरीक्षक संजय दीक्षित के माध्यम से हुई थी। इन सभी लीज डीड व रजिस्ट्री पर आपत्ति जताते हुए मुख्य नगरपालिका अधिकारी रितु मेहरा ने कहा है कि इस भूखंड की लीज डीड सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव ने कराई थी जबकि उन्हें दस्तावेज निष्पादित व पंजीकृत करने का कोई अधिकार नहीं था। इटारसी नगरपालिका प्रशासन को इस लीज डीड का पता तब चला जब भूखंड की लीज कराने वाले ने सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज कराया और उसका सूचना पत्र इटारसी नगरपालिका को मिला। यही बात अजय मित्तल वाले भूखंड के मामले भी कही गई है।
फर्जीवाड़ा करने वालों को बख्शा
इटारसी नगरपालिका ने फर्जी ढंग से शासकीय भूखंड हथियाने वाले खरीदारों पर नजरें टेढ़ी करते हुए उनकी लीज डीड निरस्त करने का कदम उठाया है और कोर्ट तक पहुंच गई है मगर जिन कर्मचारियों-अधिकारियों ने उन भूखंडों को अधिकार नहीं होने के बावजूद कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से विक्रय किया और उसकी राशि भी नगरपालिका में जमा नहीं की उनके खिलाफ नगरपालिका प्रशासन खुद एफआईआर कराने क्यों नहीं जा रहा है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों को सबक सिखाने की जगह उन्हें बचाने का प्रयास करके दूसरे कर्मचारियों को भी उसी राह पर चलने की शह देने का संदेश दिया जा रहा है।
इनका कहना है
इटारसी नगरपालिका ने 6 भूखंडों की लीज रद्द करने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया है। नपा का यह कदम उचित है मगर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन कर्मचारियों ने फर्जीवाड़ा कर भूखंड बेचे और उसकी राशि का गबन किया उन पर एफआईआर क्यों नहीं कराई जा रही है।
यज्ञदत्त गौर, पूर्व पार्षद
हमने नगरपालिका परिषद की बैठक के लिए प्रश्नकाल में इन मामलों के लिए प्रश्न लगाया था। उसके बाद ही नपा ने यह कदम उठाया है। इटारसी नगरपालिका प्रशासन को उन कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर कराना चाहिए जिन्होंने इस तरह का फर्जीवाड़ा किया और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई।
शिवकिशोर रावत, पार्षद वार्ड 4

इटारसी नगरपालिका ने भूखंडों की लीज रद्द करने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया है। इन भूखंडों की लीज डीड करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाएगी।
रितु मेहरा, सीएमओ इटारसी
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