सीवेज प्रोजेक्ट में बिछना है 143 किमी लंबी पाइप लाइन
नर्मदापुरम। नर्मदा नदी को गंदे नालों के पानी के प्रदूषण से मुक्त करने के लिए बना सीवेज(seevage project) प्रोजेक्ट कछुआ चाल से रेंग रहा है। दिसंबर 2025 में टाइम लिमिट खत्म होने के बाद कंपनी को फिर कुछ महीनों की मोहलत मिलने से इस प्रोजेक्ट के अभी कुछ महीने और खिंचने के आसार हैं। सीवेज प्रोजेक्ट की कछुआ चाल और सडक़ों की खुदाई से बदहाल हुई सडक़ों पर आवागमन जनता के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है। कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी पक्ष अपनी पूरी ताकत से सीवेज प्रोजेक्ट को अंजाम तक जल्दी पहुंचाने की तरफ गंभीर नहीं दिख रहे हैं जिसे इस बार फिर मानसून में शहर की जनता कीचड़ से सनी सडक़ों पर हादसों के रूप में इस लापरवाही के दुष्परिणाम के रूप में भुगत सकती है।
उल्लेखनीय है कि सीवेज प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंस्ट्रक्शन कंपनी ने एमपीयूडीसी यानी मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी से समय सीमा बढ़ाने तीसरी पत्र भेजा था। कंपनी को दिसंबर 2025 तक सीवेज प्रोजेक्ट खत्म करना था। एमपीयूडीसी इस पत्र के बाद ही कंस्ट्रक्शन एजेंसी को कुछ महीने का समय दे दिया था।
वर्ष 2016-17 में मिली थी स्वीकृति
नर्मदापुरम शहर के लिए 129 करोड़ के सीवेज प्रोजेक्ट को शासन ने वर्ष 2016-17 में स्वीकृत किया था। उसके बाद टेंडर प्रक्रिया आदि कराने के बाद यह काम प्रास कंपनी को दिया गया था मगर यह कंपनी सही तरीके से काम ही नहीं कर पाई और कंपनी ने काम बीच में ही छोड़ दिया था। उसके बाद जून 2023 में भुगन इन्फ्रा को यह काम दिया गया था। नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने की बहुप्रतीक्षित योजना अब तक अधूरी पड़ी हुई है।
95 किमी बिछ चुकी है लाइन
इस प्रोजेक्ट के तहत पूरे शहर में करीब 143 किमी लंबाई में पाइप लाइन बिछाई जाना है मगर भुगन इन्फ्रा कंपनी के काम की सुस्त रफ्तार के लिए यह काम ही पूरा नहीं हुआ है। अब तक कंपनी केवल 120 किमी में ही लाइन बिछा सकी है। बाकी का काम अब तक अधूरा पड़ा हुआ है। इस 120 किमी लंबाई में पाइप लाइन बिछने के दौरान सडक़ों की खुदाई ने आम जनता को परेशान कर दिया था। बाकी पाइप लाइन बिछाने के दौरान भी अब शहर के बाकी बचे हिस्सों में रहने वाले लोगों की आफत होना तय है।
5 में से 2 ही पंपिंग स्टेशन बने
सीवेज प्रोजेक्ट के तहत शहर में पांच जगहों पर पंपिंग स्टेशन (pumping station
)बनाए जाना हैं। इनमें से 1 मेन पंपिंग स्टेशन आदमगढ़ क्षेत्र में बनाया गया है जो बनकर तैयार हो गया है। वहीं राजघाट पंपिंग स्टेशन भी तैयार हो गया है। बाकी के तीन इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशनों में मालाखेड़ी पंपिंग स्टेशन, भोपाल तिराहे पर बनने वाला पंपिंग स्टेशन और कोरी घाट पंपिंग स्टेशन अब तक नहीं बन पाए हैं।
एक नजर में प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट-सीवर लाइन प्रोजेक्ट
स्वीकृति- वर्ष 2017-18
कुल लागत-150 करोड़ रुपए
कुल पाइप लाइन बिछना है-143किमी
अब तक पाइप बिछे-करीब 80 किमी
पाइप लाइन का अधूरा काम-63किमी
नपा पर लग चुका है 3.46 करोड़ का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के तहत सितंबर 2024 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 10 जिलों के 16 नगरीय निकायों पर 79.44 करोड़ रुपये का पर्यावरण क्षति जुर्माना लगाया था। इसमें नर्मदापुरम नगर पालिका पर सबसे अधिक 3.46 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
नर्मदा को गंदा कर रहे 30 हजार मकान
शहर के 33 वार्डों के लगभग 30 हजार घरों का निकासी पानी छोटे-बड़े नालों के जरिए सीधे नर्मदा में मिल रहा है। बोर्ड द्वारा सेठानी घाट से राजघाट तक अलग-अलग स्थानों से जल के नमूने लिए गए थे। जिनमें बैक्टीरिया की मात्रा मानकों से काफी अधिक पाई गई थी।
इनका कहना है
सीवेज प्रोजेक्ट में अभी पाइप लाइन बिछाने और पंपिंग स्टेशनों के कुछ काम होना शेष है। कंपनी द्वारा काम को तेजी से करने का प्रयास किया जा रहा है मगर कई कारणों से काम की गति प्रभावित हो जाती है।
नरेंद्र सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर भुगन इन्फ्रा
सीवेज प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी को कुछ समय की अवधि दी गई है। कंपनी को दिए गए समय में काम खत्म करने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
राजीव गोस्वामी, प्रबंधक एमपीयूडीसी
