इटारसी। सुखतवा की पूर्वा विकास समिति की पूर्व अध्यक्ष और 1 अन्य सदस्य के खिलाफ पशु कुक्कुट और अन्य प्रशिक्षण के नाम पर 7 लाख रूपये का गबन करने के मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने बड़ा फैसला दिया है। तीसरे सदस्य को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। पूर्वा विकास समिति के पदाधिकारियों को 7 साल की सजा और 11-11 हजार रूपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। सम्पूर्ण प्रकरण मे शासन की ओर से पैरवी अति लोकअभियोजक सत्यनारायण चौधरी और भूरेसिंह भदौरिया द्वारा की गई। पूर्वा विकास समिति सुखतवा की अध्यक्ष शारदा प्रणा और कनछेदीलाल दामले को धारा 471.120 वीं. 420.467.471 मे न्यायलय तृतीय अपर सत्र न्यायधीश आदित्य रावत द्वारा इन धाराओं मे दोषी पाते हुये 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 11000-11000 हजार रु के जुर्माने से दण्डित किया है। एजीपी सत्यनारायण चौधरी और एजीपी भूरेसिंह भदौरिया ने बताया कि मप्र शासन की एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के अंतर्गत पशु कुक्कुट और अन्य प्रशिक्षण पूर्वा विकास समिति के माध्यम से 60 हितग्राहियों को कराया जाना था। तत्कालीन समिति अध्यक्ष आरोपी शारदा प्रणा थी। योजना के अनुसार ग्राम सुखतवा मे 15 दिवस का हितग्राहियों को प्रशिक्षण देना था। समिति अध्यक्ष शारदा प्रणा और कनछेदी लाल ने मात्र 1 दिन का प्रशिक्षण देकर करीब 7 लाख रु का गबन करते हुए झूठे दस्तावेज के माध्यम से हितग्राहियों के खाते से राशि निकाल ली थी। जिसकी जाँच शासन स्तर पर कराई गई जिसमें पाया गया कि आरोपी समिति अध्यक्ष शारदा प्रणा, कनछेदी लाल और मीना राठौर ने आर्थिक गड़बड़ी की है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना केसला मे आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर न्यालय मे अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था। एजीपी चौधरी और भदौरिया ने बताया कि इस प्रकरण मे 59 गवाह प्रस्तुत किये गए और 267 दस्तावेज प्रस्तुत कर आरोपी शारदा प्रणा और कंन्छेदी लाल के खिलाफ आरोप सिद्ध किया गया। तीसरे आरोपी मीना राठौर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। न्यायालय ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगो के साथ धोखाधड़ी कर राशि हड़पी है जो गंभीर अपराध है। न्यायालय ने अभियोजन से सहमत होते हुए आरोपियों को सजा से दण्डित कर जिला जेल नर्मदापुरम भेजा है।

