इटारसी कृषि मंडी से रसूलिया गेट तक सोलर लाइट की दरकार, अंधेरे में सफर करती जिंदगियां

एमपीआरडीसी भी नहीं दे रहा है ध्यान
इटारसी। इटारसी कृषि उपज मंडी से लेकर रसूलिया रेलवे गेट तक बड़ी संख्या में पक्के निर्माण हो गए हैं। दोनों ही शहरों की कनेक्टिविटी भी हो गई है जिससे हजारों लोगों का आवागमन सुबह से देर रात तक होता है मगर कड़वा सच यह है कि ये हजारों जिंदगियां अंधेरे के वक्त हादसे के खतरों के बीच आवागमन करने को मजबूर हैं। सडक़ के इस हिस्से में कम खर्च वाले सोलर लाइट लगाने की पहल अब तक नहीं होना, यह बताता है कि जिम्मेदारों को इस सडक़ से देर रात तक मजबूरी के चलते आवागमन करने वालों और उनके परिवारों की चिंता नहीं है। यह सडक़ मप्र सडक़ विकास निगम के अधिपत्य में आने के बावजूद एमपीआरडीसी ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया है।
पहले था नेशनल हाइवे, अब एमपीआरडीसी है मालिक
बैतूल से भोपाल जाने वाली यह सडक़ पहले नेशनल हाइवे ६९ हुआ करती थी। बाद में फोरलेन बनने के बाद इस सडक़ को नेशनल हाइवे की कैटेगिरी से बाहर कर दिया गया और सडक़ की जिम्मेदारी एमपीआरडीसी को सौंप दी गई। इस सडक़ की देखरेख का जिम्मा एमपीआरडीसी को मिले हुए लंबा वक्त बीतने के बाद भी एमपीआरडीसी ने कभी इस सडक़ को फोरलेन की तर्ज पर विकसित करने की तरफ ध्यान नहीं दिया है। इस सडक़ पर आवागमन में सुगमता के लिए एमपीआरडीसी आज तक सोलर लाइट तक नहीं लगा पाई है।
कृषि मंडी से सीपीई तक हो चुका है काम
इटारसी कृषि उपज मंडी से सीपीई गेट तक के हिस्से में भी करीब एक साल पहले तक रात के समय वाहन चलाना खतरनाक हुआ करता था। बाद में जनता की मांग को देखते हुए कृषि मंडी से सीपीई गेट तक सडक़ के दोनों तरफ और ओवरब्रिज पर बीच के हिस्से में सोलर लाइट लगाए गए हैं जिससे आवागमन बहुत सुरक्षित हो गया है। अब इसी तर्ज पर कृषि मंडी से रसूलिया रेलवे गेट तक के हिस्से में सोलर लाइट की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
हजारों लोग करते हैं आवागमन
नर्मदापुरम जहां संभाग मुख्यालय है तो इटारसी मप्र का बड़ा जंक्शन है, आयुध निर्माणी रखता है, एसी शेड और डीजल शेड जैसे बड़े उपक्रम यहां संचालित है। इन परिस्थितियों में हजारों लोगों का आवागमन सुबह से देर रात तक दोनों शहरों में होता रहता है। शाम को सूर्यास्त के बाद इस रूट पर घना अंधेरा हो जाता है जिससे दो पहिया चालकों के लिए आवागमन खतरनाक हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं को होती है जो नौकरी के लिए एक शहर से दूसरे शहर आना जाना करती हैं।
इनका कहना है
इटारसी से नर्मदापुरम अब लगभग कनेक्ट हो गए हैं। मौजूदा रोड से देर रात तक लोगों की आवाजाही होती है मगर रात में घना अंधेरा होने से वाहन चलाना खतरे का काम है। इस सडक़ पर पर्याप्त बिजली व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
प्रदीप जाधव, निवासी न्यास कॉलोनी
हमारा इस रोड से प्रतिदिन आवागमन होता है। सूर्यास्त के पहले तक आवागमन में दिक्कत नहीं आती है मगर सूर्यास्त के बाद इस रोड पर आवागमन में बहुत परेशानी होती है क्योंकि घने अंधेरे और बड़े वाहनों की हेडलाइट के कारण सामने का कुछ नहीं दिखता है। इस रोड पर सोलर लाइट लगने चाहिए।
ब्रजेश मालवीय, निवासी सूरजगंज
अभी नर्मदापुरम से इटारसी जाने वाली सडक़ पर इस तरह का कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। चूंकि आपसे इस विषय पर जानकारी मिल रही है तो इसका परीक्षण कराने का प्रयास करेंगे और वरिष्ठ कार्यालय से पत्राचार कर लेंगे।
प्रवीण निमजे, अधिकारी एमपीआरडीसी
आपने जो विषय उठाया है वह बहुत गंभीर है मगर यह प्रोजेक्ट काफी बड़ा है जिस पर फंड अधिक लगेगा। फिर भी इसके लिए प्रयास करेंगे और एमपीआरडीसी से पत्राचार किया जाएगा।

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