अंतरजातीय विवाह की प्रोत्साहन राशि के नाम पर 10 हजार की घूस लेते रंगेहाथ पकड़ाया कलेक्टर कार्यालय का बाबू….

नर्मदापुरम। शासकीय दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी अधिकारी घूसबाजी के चक्कर में अपने और अपने परिवार के मुंह पर कालिख पुतवा रहे हैं। रिश्वतखोरी की लत के चक्कर में वे खुद ही उलझ रहे है। पिछले 15 दिन में रिश्वतखोरी के चक्कर में शासकीय कर्मचारियों के पकड़ाने के 2 मामले सामने आना नर्मदापुरम जिले में खुलेआम चल रही घूसखोरी का बड़ा प्रमाण है। मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित जनजाति कार्यालय में लोकायुक्त पुलिस ने फिर शासकीय कर्मचारी को बेनकाब किया। लोकायुक्त पुलिस ने सहायक ग्रेड–2 के कर्मचारी मनोज सोनी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया तो पूरे कलेक्ट्रेट में हड़कंप मच गया। यह रिश्वत उस योजना के बदले मांगी गई, जो समाज में समरसता बढ़ाने के लिए बनाई गई थी। शिकायतकर्ता प्रवीण सोलंकी ने अंतरजातीय विवाह किया था, जिसके तहत शासन से दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलनी थी। लेकिन यह हक़ पाने के लिए उसे सरकारी दफ्तर में सौदेबाज़ी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि कलेक्टर कार्यालय की भंडार शाखा, जनजातीय कार्यालय में पदस्थ बाबू मनोज सोनी ने बैक डेट में फाइल तैयार करने और भुगतान आगे बढ़ाने के बदले पहले 10 हजार रुपये और काम होने के बाद 7 हजार रुपये की मांग की। मजबूर होकर आवेदक ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल दुर्गेश राठौर से की, जिसके बाद जाल बिछाया गया और आरोपी पकड़ा गया। 49 वर्षीय मनोज सोनी को उसके ही कक्ष में रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई नर्मदापुरम शहर में पिछले दो महीनों में लोकायुक्त की तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले कृषि विभाग के एक उप संचालक स्तर के अफसर को खाद बीज दुकान का लाइसेंस बहाल करने के एवज में पैसे लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।