5 हजार की रिश्वत ने पोत दी सामाजिक प्रतिष्ठा पर कालिख, महिला डॉक्टर और सहयोगी को 4- 4 साल की जेल

नर्मदापुरम। करीब 5 साल पहले बाबई बीएमओ रहने के दौरान महिला चिकित्सक शोभना चौकसे ने एक एएनएम से पूरा वेतन निकालने के एवज में 5 हजार रुपए की घूस मांगी थी। घूस की रकम डॉक्टर शोभना चौकसे ने अपने एक सहयोगी के माध्यम से ले तो ली मगर वे लोकायुक्त के ट्रैप में फंस गए। मामला दर्ज होने के बाद कोर्ट में मामले की सुनवाई चली। करीब साढ़े 5 बाद प्रथम अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश जफर इकबाल द्वारा आरोपी डॉ.शोभना चौकसे और सहयोगी मिलन यादव को लोकायुक्त अधिनियम की धारा 7,12,13(1)डी,13(2) में 04-04 वर्ष का कारावास तथा कुल 15,000-15,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया। डॉक्टर शोभना चौकसे की करतूत ने उन्हें जहां जेल भिजवा दिया वहीं उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर कालिख भी पोत दी।

यह है मामला

6 जून 2020 को आवेदिका शोभा गजानन ए. एन. एम. बाबई में सामुदायिक स्वास्‍थ्‍य केन्द्र में ए.एन.एम. के पद पर थी। डॉ शोभना चौकसे उसका पूरा वेतन निकालने के नाम पर 5,000/- हजार रूपये की मांग करती थी। डॉ शोभना चौकसे ने फरियादी एएनएम शोभा गजानन का वेतन रोक दिया था। उनको वेतन काटने की धमकी दी और दस हजार रूपये की मांग की थी। फरियादी ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की तब लोकायुक्त ने डॉ शोभना चौकसे को दस हजार रूपये रिश्‍वत लेते हुए पकड़ने का जाल बिछाया।

कंपाउंडर ने झेले थे रुपए

लोकायुक्त भोपाल की टीम ने 6 जून 2020 को बाबई स्वास्थ्य केंद्र की तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. शोभना चौकसे के शासकीय आवास पर छापामार कार्रवाई की। साक्ष्य के आधार पर तत्कालीन लोकायुक्त टीआई वीके सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापामार कार्रवाई की गई थी। लोकायुक्त टीम जब बीएमओ के शासकीय आवास पर पहुंची थी तो वहां डॉ. चौकसे मौजूद नहीं थीं। एनएनएम शोभा ने पूर्व योजना अनुसार रिश्वत के पैसे देने जब तत्कालीन बीएमओ डॉ शोभना चौकसे से फोन पर चर्चा की तो उन्होंने घर पर मौजूद कंपाउंडर को रुपये देने को कहा था। एएनएम ने जब रिश्वत के रुपये कंपाउंडर को दिए तो पीछे से आई लोकायुक्त की टीम ने कंपाउडर को रंगे हाथों पकड़ लिया था।

कोर्ट ने किया दंडित

लोकायुक्‍त द्वारा प्रकरण की कार्यवाही कर अभियोग पत्र  न्‍यायालय के समक्ष पेश किया गया था। न्यायालय के समक्ष विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के आधार पर आरोपीगणों के विरूद्ध अपराध प्रमाणित पाये जाने पर अभियुक्तगण को दोषी पाकर दण्डित किया गया। प्रकरण में शासन की ओर से वरिष्ठण सहायक लोक अभियोजन अधिकारी अरूण पठारिया, जिला नर्मदापुरम द्वारा पैरवी की गई।

इनका कहना है

न्यायालय ने करीब साढ़े 5 साल पुराने एक मामले में डॉ शोभना चौकसे और एक अन्य सहयोगी दोषी पाकर 4-4 साल की सजा सुनाई है और 15000-15000 रुपए का अर्थदंड भी किया है। मामले में एक एएनएम द्वारा तत्कालीन बीएमओ डॉ शोभना चौकसे की पूरा वेतन निकालने के एवज में 5 हजार की रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त पुलिस को की गई थी जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने दोषियों की धरपकड़ की थी

राजकुमार नेमा, सहायक निदेशक लोक अभियोजन संचालनालय नर्मदापुरम