6 माह से 5 फाइलों के लिए परेशान आरटीआई एक्टिविस्ट ने तहसील गेट पर दिया धरना, इनाम भी किया घोषित…..

इटारसी। तहसील कार्यालय में एक आरटीआई एक्टिविस्ट की पांच फाइलों का अतापता नहीं है। करीब छह महीने से तमाम स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की कार्यप्रणाली का हाल यह है कि अभी तक उनकी फाइलों के बारे में कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अफसरों के चक्कर काटने से परेशान होकर ज्ञानेंद्र उपाध्याय ने तहसील कार्यालय के गेट पर ही धरना दे दिया। उन्होंने फाइल ढूंढकर लाने वाले के लिए 50 हजार के इनाम की घोषणा कर दी। एक्टिविस्ट के इस कदम से प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। नायब तहसीलदार के ज्ञापन झेलने और 3 दिन में फ़ाइल ढूंढकर देने का आश्वासन मिलने पर ही एक्टिविस्ट ने गेट से उठने का निर्णय लिए।

उल्लेखनीय है कि आरटीआई एक्टिविस्ट ज्ञानेंद्र उपाध्याय के जमीन संबंधी प्रकरणों से जुड़ी करीब 5 फाइलें तहसील कार्यालय के खंड रामपुर सर्किल नायब कार्यालय में थी। छह महीने से वे उन फाइलों को पाने के लिए प्रयास कर रहे है। उन्होंने प्रक्रिया के तहत हर वो दरवाजा खटखटाया जहां उन्हें कार्रवाई की उम्मीद दिखी मगर उनके हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। कुछ माह पहले उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में। शिकायत दर्ज करने का प्रयास करना चाहा तो पूर्व में पदस्थ एक अधिकारी ने 3 दिन फाइलें देने का वादा करके उन्हें शिकायत करने से रुकवा दिया। वो मियाद भी खत्म हो गई मगर फ़ाइलों का कुछ पता नहीं चला और दूसरी तरफ एक्टिविस्ट ज्ञानेंद्र उपाध्याय के हिस्से धक्के आते रहे। प्रशासन की इस लापरवाही से परेशान होकर उन्होंने गांधीगिरी को ही अपना हथियार बनाया और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ तहसील कार्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने वहां इस बात की भी घोषणा कर दी कि जो भी उनकी फाइलें ढूंढकर लाएगा उसे वे 50 हजार का इनाम देंगे। अधिवक्ता के इस कदम से प्रशासनिक गलियारे में शर्मिंदगी की हवा चल पड़ी। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार उपाध्याय से मिलने पहुंचे तो उन्होंने नायब तहसीलदार को पूरे घटनाक्रम और दिए गए दस्तावेज दिखाए। उन्होंने नायब तहसीलदार को फाइल दिलाने संबंधी एक आवेदन भी सौंपा। आवेदन पर नायब तहसीलदार ने एक्टिविस्ट को कहा कि वे धरने पर उठ जाएं, अब उन्हें परेशान नहीं होना पड़ेगा। 3 दिन उनके सभी प्रकरणों की फाइल उन्हें ढूंढकर दे दी जाएगी। ज्ञानेंद्र उपाध्याय ने कहा कि हम 6 महीने से अपनी फाइलों के लिए परेशान है। इससे पता चलता है कि प्रशासनिक अफसर काम के प्रति कितनी लापरवाही करते है। परेशान होकर हमें धरना देने और इनाम घोषित करने का कदम उठाना पड़ा। इस मामले में नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार ने कहा कि उनका प्रकरण करीब दस साल पुराना है। इस पहले भी एक बार टीम लगाकर उन फाइलों को ढूंढा गया था मगर कुछ पता नहीं चला। आज तहसीलदार कार्यालय से एक और टीम बनाई गई है। हम स्टोर रूम में हर एक फाइल चेक कराएंगे और उन्हें उपलब्ध कराएंगे। कार्यालय से फाइलें गुमने का कोई सवाल ही नहीं है। रिकॉर्ड ज्यादा होने से कई बार फाइलें कही दब जाती हैं।