दिव्यांग बेटे को व्हीलचेयर पर लेकर थाने पहुंची रिटायर्ड शिक्षिका, बेटे के लिए लगवाना थी लिफ्ट, कम्पनी ने काम नहीं किया तो पुलिस से लगाई गुहार….

नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के धार्मिक शहर कहलाने वाले नर्मदापुरम में साइबर फ्रॉड के साथ अन्य आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब नर्मदापुरम लिफ्ट लगाने के नाम पर एक बुजुर्ग महिला से लाखों रुपये लेने के बाद काम पूरा नहीं करने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा उस समय हुआ जब रिटायर्ड शिक्षिका अपने दिव्यांग बेटे को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंची। शहर के कालिकानगर निवासी 73 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका दीपाली शर्मा ने शिकायत की है कि भोपाल की एक लिफ्ट कंपनी को उन्होंने लिफ्ट लगाने का काम दिया था। कंपनी ने एडवांस के तौर पर 4 लाख रुपये ले लिए थे मगर कंपनी ने पैसा लेने के बावजूद न तो लिफ्ट लगाई और न ही उनकी रकम लौटाई। कई बार कम्पनी से बात करने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो वह अपने दिव्यांग बेटे को व्हीलचेयर पर बैठाकर कोतवाली थाने पहुंचीं और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कंपनी संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दिव्यांग बेटे को होती थी परेशानी

रिटायर्ड शिक्षिका दीपाली शर्मा ने बताया कि वह अपने दिव्यांग बेटे के साथ रहती हैं। बारिश के दौरान घर में पानी भर जाने से बेटे को बाहर लाने-ले जाने में काफी परेशानी होती थी। इसी वजह से उन्होंने मकान की पहली मंजिल का निर्माण कराया और वहां तक आसानी से पहुंचने के लिए लिफ्ट लगाने का निर्णय लिया मगर कंपनी ने उन्हें उलझा रखा है।

7 लाख में तय हुआ था सौदा

 पीड़िता शिक्षिका के अनुसार भोपाल स्थित सेल्को लिफ्ट एंड एस्केलेटर कंपनी के संचालक मनीष मिश्रा से लिफ्ट लगाने के लिए 7 लाख रुपये में अनुबंध हुआ था। समझौते के तहत उन्होंने अलग-अलग चरणों में कुल 4 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए। जिसमें 1 अक्टूबर 2025 को 1 लाख, 31 अक्टूबर 2025 को 2 लाख और 24 जून 2026  को 1 लाख तीन किस्त में दिए थे।कंपनी ने आश्वासन दिया था कि मकान का निर्माण और पुताई पूरी होने के बाद लिफ्ट लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा मगर अब तक कंपनी ने काम ही नहीं किया है। कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी टालमटोल करती रही। जब पैसे वापस मांगे गए तो वह भी नहीं लौटाए गए।

    व्हीलचेयर पर बेटे को लेकर पहुंचीं पुलिस के पास

    कम्पनी के रवैये के परेशान रिटायर्ड शिक्षिका दीपाली शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को व्हीलचेयर पर बैठाकर स्वयं कोतवाली थाने पहुंचीं तो पुलिसकर्मी भी अचंभित रह गए। उन्होंने पूरे मामले से पुलिसकर्मियों को अवगत कराया। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए कम्पनी संचालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। कोतवाली थाना प्रभारी गौरव बुंदेला के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद कंपनी संचालक से संपर्क किया गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आरोपी मनीष मिश्रा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है तथा आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

    क्या बोले कंपनी संचालक

    कंपनी संचालक मनीष मिश्रा का कहना है कि मकान के सिविल कार्य पूरे नहीं होने के कारण काम में देरी हुई। उनका दावा है कि मकान हाल ही में तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि वह 10 दिनों के भीतर या तो लिफ्ट लगाने का काम पूरा करेंगे या फिर पीड़िता की राशि वापस करने का प्रयास करेंगे, हालांकि फिलहाल एकमुश्त रकम लौटाना उनके लिए संभव नहीं है। हमारा प्रयास होगा कि हम लिफ्ट लगाने का काम कर दें।

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