इटारसी उत्सव मेला खटाई में पड़ा, कोर्ट ने विवादित भूमि से मेला हटाने का दिया आदेश…

इटारसी। शहर में लगने वाला इटारसी उत्सव मेला इस बार विवादों में घिर गया है। तमाम नियमों को ताक पर रखकर हर साल लगने वाला यह मेला इस बार कोर्ट की नजर में आ गया। जिस जमीन पर यह मेला बिना किसी सक्षम अनुमति के लगाया था उस जमीन के लीजधारक ने कोर्ट में इस पर आपत्ति जताते हुए मेला हटवाने की याचिका लगाई थी। कोर्ट ने जमीन की लीजधारक और नगरपालिका के सक्षम प्राधिकारी पक्ष सुनने के बाद विवादित भूमि पर किसी भी तरह की गतिविधि संचालित करने पर अस्थाई रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब इस मेले के सिमटने के हालात बन गए हैं। आपको बता दें कि  प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड इटारसी के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश यतिन अग्रवाल की कोर्ट ने इटारसी नपा परिषद को विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार की गतिविधि संचालित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह आदेश नगरपालिका परिषद इटारसी और पुष्पलता पटवा के बीच चल रहे दीवानी वाद के आधार पर पारित किया गया।  जिस भूमि पर मेला संचालित हो रहा है  उसकी वर्ष 2016 में नगरपालिका द्वारा पुष्पलता पटवा के नाम 30 वर्ष के लिए लीज डीड की गई थी। आवेदक ने न्यायालय में कहा था कि बिना अनुमति के विवादित भूमि पर “इटारसी उत्सव मेला” आयोजित किया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।

कोर्ट में पकड़ाया नपा का झूठ

कोर्ट में इटारसी नपा का झूठ पकड़ा गया। नपा ने कोर्ट में दावा किया था कि उक्त भूमि पर कोई मेला आयोजित नहीं हो रहा है। यह दावा नपा द्वारा दिए गए शपथ पत्र में हुआ था जो झूठा साबित हुआ। कोर्ट में सुनवाई के दौरान नपा के अधिकृत प्रतिनिधि राजकुमार भार्गव ने स्वीकार किया कि विवादित स्थल पर मेले की तैयारी चल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हर साल वहां मेला लगता है और मेले की अनुमति नगरपालिका से मांगी जाती है। कोर्ट ने इस बयान को नगरपालिका के शपथपत्र में दिए गए दावे के विरोधाभासी माना।

यह दिया कोर्ट ने आदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वर्ष 2016 की लीज डीड को अब तक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा निरस्त नहीं किया गया है। इसलिए, प्रथम दृष्टया भूमि पर अधिकार लीजधारी का ही माना जाएगा। न्यायालय ने यह भी माना कि मेले के आयोजन से आवेदक को अपूरणीय क्षति हो सकती है और सुविधा का संतुलन भी उनके पक्ष में है। पक्षकार के वकील संजय जैन ने बताया कि न्यायालय ने नपा को विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार की गतिविधियां संचालित करने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया है। कोर्ट के इस आदेश से अब इस मेले की विदाई रास्ता तैयार हो गया है।

20 हजार प्रति दुकान का किराया

सूत्रों की मानें तो इस मेले में करीब 100 दुकानें लगाई गई थी। प्रति दुकान का किराया करीब 20 हजार वसूला गया है हालांकि हम इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं करते हैं। मेले में जो मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं दी जा रही हैं उनकी टिकट अलग अलग दर से निर्धारित है। अब जब यह बात पब्लिक डोमेन में आई है कि मेले के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी तो यह सवाल भी उठता है कि मनोरंजन कर भी जमा कराया गया है या नहीं। अगर ये दोनों प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ है तो निश्चित तौर पर यह मामला आपराधिक श्रेणी में आता है।

इनका कहना है

कोर्ट ने विवादित भूमि से मेला हटाने का आदेश दिया है। शनिवार को नपा टीम भेजी जाएगी। जमीन की लीजधारक पुष्पलता पटवा के प्लाट का सीमांकन किया जाएगा। अगर विवादित भूमि पर मेला लगा है तो मेला वहां से हटाया जाएगा।

रितु मेहरा, सीएमओ इटारसी

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