नवजात शिशु के लिए अमृत के समान होता है मां का दूध, मां के लिए दुग्धपान एक संकल्प की तरह है…

विश्व स्तनपान दिवस पर आयोजित हुई कार्यशाला
इटारसी। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के वार्षिक गतिविधि कैलेंडर के अंतर्गत महाविद्यालय की प्राचार्य महोदय डॉ नीता राजपूत के मार्गदर्शन और संरक्षण में और राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ राधा आशीष पांडे के निर्देशन में स्तनपान सप्ताह का आयोजन किया गया। स्तनपान सप्ताह प्रतिवर्ष 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। महाविद्यालय के डॉ सौरभ तिवारी ने बताया कि बच्चे के जन्म के पश्चात मां का दूध बच्चे के लिए एक अमृत के समान होता है। जन्म के पश्चात मां के दूध से निकलने वाला पदार्थ बच्चे की बढ़ोतरी, सुनने की क्षमता, याददाश्त में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महाविद्यालय की प्राचार्य द्वारा छात्राओं को स्तनपान के महत्व के बारे में बताया गया कि मां का दूध पिलाना एक विकल्प नहीं यह एक संकल्प होना चाहिए। एक नवजात शिशु के लिए दूध का बहुत महत्व होता है क्योंकि यह प्रथम 6 माह तक एक शिशु का पूर्ण आहार होता है जिससे शिशु का मानसिक तथा शारीरिक विकास होता है। कार्यक्रम राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ राधा आशीष पांडे ने छात्राओं को स्तनपान के बारे में विस्तृत जानकारी दी और विश्व स्तनपान सप्ताह के इतिहास से विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों को अवगत कराया कि डब्लूएचओ, यूनिसेफ और अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा इस सप्ताह को आयोजित करने की स्वीकृति दी गई थी जिसे प्रतिवर्ष 1992 से लगातार मनाया जा रहा है। आज विश्व के लगभग 100 से अधिक देश इस सप्ताह को मना रहे हैं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वर्ष 2025 की थीम स्तनपान को प्राथमिकता दे और स्थाई सहायता प्रणालियां बनाएं पर विस्तृत चर्चा की। महाविद्यालय के समस्त अध्यापकों द्वारा इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य कामधेनु पटोदिया, डॉ मंजू मालवीय, डॉ हिमांशु चौरसिया, डॉ सौरभ तिवारी, डॉ प्रवीण कुशवाहा, डॉ वेद प्रकाश भारद्वाज, संध्या उपाध्याय, राकेश अहिरवार एवं महाविद्यालय की समस्त छात्र छात्राएं एवं स्वयं सेवक उपस्थित रहे।