इटारसी। पुरानी इटारसी निवासी एक युवक नीरज राजपूत कार एक्सीडेंट में घायल हो गया था। उसे उपचार के लिए दयाल अस्पताल लाया गया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। युवक की मौत के बाद परिजनों ने दयाल अस्पताल पर उपचार में लापरवाही बरतने और परिजनों को भ्रमित करने के आरोप लगाए थे। दयाल अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के इन आरोपों को सरासर गलत करार दिया है और कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने युवक की जान बचाने का पूरा प्रयास किया गया था। भोपाल के अस्पताल में भी युवक जीवित था जिसके फुटेज हमारे पास आ गए है। युवक की मौत को लेकर चल रहे इस घटनाक्रम के बीच अब करणी सेना और राजपूत समाज की भी एंट्री हो गई है। दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने मृतक के परिजनों के साथ सिटी थाने जाकर युवक की मौत के मामले में जांच करने की मांग की।
यह कहा गया ज्ञापन मे
करणी सेना एवं राजपूत समाज के प्रतिनिधियों ने इटारसी थाने पहुंचकर एसआई गुलाब रघुवंशी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें दयाल अस्पताल इटारसी के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही और आर्थिक शोषण का आरोप लगाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया है कि 4 जुलाई 2025 को सड़क दुर्घटना में घायल हुए नीरज राजपूत पुत्र धनपाल सिंह राजपूत को तत्काल दयाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नीरज के पैर की हड्डी टूट गई थी। डॉक्टर महिपाल द्वारा आश्वासन दिया गया था कि सोमवार को आयुष्मान कार्ड चालू होने के बाद ऑपरेशन किया जाएगा और कोई खतरा नहीं है लेकिन शनिवार को परिजनों पर अचानक ऑपरेशन के लिए दबाव बनाया गया और तत्काल ₹1,00,000 जमा कराए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि ऑपरेशन के लिए स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. मृणमयी दाभोलकर झा को बुलाया गया। इस बीच नीरज की हालत लगातार बिगड़ती गई और उधर अस्पताल प्रशासन परिजनों को भ्रमित करता रहा। परिजनों ने आरोप लगाया कि केवल दो दिनों में 13 बोतल ब्लड लिया गया। किसी भी प्रकार की रिपोर्ट नहीं दिखाई गई और मरीज की हालत छिपाई जाती रही। जब मरीज को गंभीर स्थिति में भोपाल के अपोलो अस्पताल ले जाया गया, तो वहाँ के डॉक्टरों ने बताया कि मृत्यु लगभग 24 घंटे पूर्व ही हो चुकी थी। करणी सेना ने इसे “संगठित लापरवाही” और “आर्थिक शोषण” की शर्मनाक मिसाल बताया। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 72 घंटों के भीतर संतोषजनक जांच व कार्रवाई नहीं की गई, तो अस्पताल और थाना परिसर का घेराव किया जाएगा। इस आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
दयाल अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
पिछले दो दिन से सोशल मीडिया पर मच रहे इस मामले को लेकर जब रीजनल वॉइस अखबार ने दयाल अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया तो अस्पताल संचालक डॉ अचलेश्वर दयाल ने बताया कि कार दुर्घटना में युवक के पैर की हड्डी टूट गई थी। कार के नुकीले हिस्से की वजह से उसकी रक्त सप्लाई वाली मुख्य नस कट गई थी। हमने पहले उसका रक्तस्राव कम करने की कोशिश की थी। उसका बीपी कम हो रहा था। उसकी जब पट्टी खोली गई तो खून का फव्वारा छूटा तब हमने उसे खून चढ़ाया। उसकी स्थिति हमारे और परिजनों के सामने ही बिगड़ने लगी थी और बीपी व पल्स नीचे जा रहे थे तब हमने उसे वेंटिलेटर पर ले गए थे। युवक को बाईपास नस लगाई गई थी मगर वह पहले ही शॉक में चले गया था जिससे उसे मल्टी ऑर्गन फेलियर हो गई था जिससे वह रिकवर नहीं हो पाया था। हमने परिजनों को बोला था कि आप अगर उसे ले जाना चाहते हैं तो ले सकते है मगर वह 20 मिनिट से ज्यादा नहीं ठहर पाएगा तब परिजनों ने कहा था कि आप ही देखें। हमारे पास परिजनों की सहमति और हर दिन की रिकॉर्डिंग भी है। अस्पताल में 24 घंटे पहले मौत होने की जो बात कही जा रही है वह भी गलत है क्योंकि जब उसे भोपाल ले जाया जा रहा था तब भी वह जीवित था और भोपाल के अस्पताल में पहुंचने के बाद भी जीवित था। हमारे पास भोपाल के अस्पताल की सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग भी आ गई है। कुल मिलाकर हमारा कहना यही है कि हमने मरीज की जान बचाने की पूरी कोशिश की थी। अगर जांच होती भी है तो हम सारे तथ्य सामने रखेंगे।

