नर्मदापुरम // कलेक्टर सोनिया मीना ने जिले में रेत, मिट्टी, लाल मुरम आदि खनिज संपदा के अवैध उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके इटारसी के आसपास के ग्रामीण अंचलों से मिट्टी, भसूआ, मुरूम, लाल मुरूम, काली मिट्टी आदि खनिज संपदा का अवैध उत्खनन और परिवहन बेधड़क किया जा रहा है। पिछले दिनों कलेक्टर की जनसुनवाई में भी इस तरह की शिकायतें सामने आई थी। इन शिकायतों पर जिला खनिज अधिकारी दिवेश मरकाम को जिला प्रशासन ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। जिला खनिज अधिकारी के निर्देश पर खनिज निरीक्षक पिंकी चौहान ने टीम के साथ इटारसी के ग्रामीण अंचलों में कार्यवाही करने पहुंची।खनिज निरीक्षक के पहुंचने की खबर से लाल मुरम, मिट्टी का अवैध कारोबार करने वालों में भगदड़ मच गई। सूत्रों के अनुसार जानकारी मिलते ही ग्रामीण अंचलों में उत्खनन करने वाले माफियाओं ने अपने डंपरों और जेसीबी को इधर-उधर गायब कर दिया। उसके बावजूद खनिज निरीक्षक पिंकी चौहान ने लाल मुरम से भरा एक डंपर पकड़ने में सफलता हासिल की। खनिज निरीक्षक पिंकी चौहान ने बताया कि ग्राम पांडरी से एक डंपर को पकड़ा है जिसमें लाल मुरम भरी हुई थी और रॉयल्टी भी नहीं थी उक्त डम्फर ड्राइवर संजीव कुमार लेकर आया था। डंपर क्रमांक MP 05 G7890 परिवहन विभाग में नागपुर कलां ऑर्डिनेंस फैक्ट्री रोड इटारसी निवासी पुनीत शर्मा के नाम से दर्ज है। इसे पथरोटा थाने की अभिरक्षा में खड़ा किया गया है। विभाग जल्द ही इसमें जुर्माना लगाने की कार्रवाई करेगा।
यहां से हो रहा अवैध उत्खनन
इटारसी तहसील के अंतर्गत ग्राम कीरतपुर, जामई, जमानी, पांडरी, करखा जामई, पथरोटा नजरपुर ,कवेली, सोमलवाडा कला आदि ग्रामीण क्षेत्रों में काली मिट्टी, लाल मुरम सहित भसुआ का बड़े स्तर पर अवैध उत्खनन व परिवहन चल रहा है। अवैध उत्खनन और परिवहन के माध्यम से मिट्टी और लाल मुरम की सप्लाई का खेल निर्माणाधीन कॉलोनी और राइस मिलों तक हो रहा है। जहां पर इनका फिलिंग में उपयोग हो रहा है। अवैध उत्खनन से शासन को प्रति माह लाखों रुपए की राजस्व हानि भी उठानी पड़ रही है।
सप्लायरो और जिम्मेदार अफसरों की जेब में जा रहा पैसा
जिला प्रशासन ने इटारसी एवं आसपास के क्षेत्र में निर्माणाधीन कालोनियों एवं मिल निर्माण में फिलिंग में डाली जा रही खनिज संपदा की रायल्टी की जांच के लिए अभी तक कोई टीम भी नही बनाई है। इन कालोनियों और राइस मिलों में फिलिंग लेवल की जांच में बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है। निर्माणाधीन कॉलोनाइजर और मिल निर्माणकर्ता उपयोग की जा रही खनिज संपदा का पूरा पैसा सप्लायर को देते हैं। इस अवैध उत्खनन की आड़ में शासन को जीएसटी का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इधर जिला प्रशासन द्वारा अलग जांच टीम से जांच नही कराए जाने से सांठगांठ में भागीदार बनने वाले अफसरों और अवैध उत्खनन करने वालों के वारे-न्यारे हो रहे हैं।
